कोविड-19 कम्युनिटी स्प्रेड स्टेज तक पहुंचा

कोविड-19 को लेकर को लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर परिस्थितियां चाहे नियंत्रण में होने का दावा करते हो लेकिन, लगता है कि प्रदेश में कोविड-19 कम्युनिटी स्प्रेड स्टेज तक पहुंच चुका है। यदि गांव ने कोविड-19 संक्रमण को उगला तो प्रदेश सरकार के यह दावे खोखले साबित होंगे कि राज्य में वेड्स, ऑक्सीजन तथा वेंटिलेटर की पर्याप्त व्यवस्था है। प्रदेश की 90 प्रतिशत आबादी गांव बस्तीें है। राज्य के गांव में स्वास्थ्य सेवा की हालत कैसी है,यह किसी से छुपा नहीं है। सारा दोष वर्तमान सरकार का भी नहीं है। खामियां विभिन्न पूर्व सरकारों की भी रही हैंै जिनकी दोषपूर्ण नीतियों के कारण प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा को मजबूत नहीं हो पाया। यहां उन दिनों की याद भी दिलवाना आवश्यक है जब स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में स्वास्थ्य के क्षेत्र में विजन 2020 पेश किया था। इस मिशन के तहत यह दावा किया गया था कि 2020 तक राज्य के प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होगी। आज 20 21 में हम स्वास्थ्य क्षेत्र में दो कदम भी आगे नहीं बढ़ पाए हैं। विजन 2020 के तहत यह कहा गया था कि स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या बढ़ाए जाने के स्थान पर आधारभूत ढांचें को मजबूत किया जाएगा। सरकारें बदलती रही ओर विजन 2020 कचरे के डिब्बे में चला गया। प्रणाम यह कि आज स्वस्थ्य संस्थानों में पर्याप्त स्टाफ नहीं है जो कोरोना से निपट पाने में सक्षम हो। सरकार वेंटिलेटर पर्याप्त होने का दावा चाहे करती हो, लेकिन जिलों में उन्हें चलाने वाले विशेषज्ञय प्रर्याप्त नहीं हैं। गांव उप बस्तियों में स्वास्थ्य कर्मचारियों के खाली संस्थानों के कारण जनता अपने आप को असहाय महसूस कर रही है। कोविड-19 संक्रमण के वास्तव में कितने मामले हैं उसका सही आंकलन उस समय तक नहीं किया जा सकता जब तक कि प्रदेश में टेस्ट करने की सुविधा पर्याप्त मात्रा में ना हो। दूर गांव का संक्रमित रोगी मीलों दूर टेस्ट करवाने के लिए नहीं आ सकता यह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी बेहतर जानते हैं शायद यही कारण है कि गांव का संक्रमित वहां चिकित्सकों के अभाव के चलते नीम हकीम डॉक्टरों से इलाज करवाने को विवश है। बेहतर चिकित्सा संस्थानों में सवंमित को तभी पहुंचाया जाता है जब वह गंभीर परिस्थितियों में होता है तथा चिकित्सकों के लिए उसे बचाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही कारण है कि राज्य में कोरोना संक्रमित रोगियों की मृत्यु दर लगातार बढ़ती जा रही है जो चिंता का विषय है। बेहतर प्रबंध होते तो संक्रमन रोका भी जा सकता था। कोविड-19 के इस दौर में प्रशासन का प्रबंधन प्रत्येक स्तर पर विफल रहा है, यह आरोप लगने लगे हैं। आवश्यक्ता है कि वर्तमान ढांचे तथा नीतियों में सुधार कर ऐसे प्रबंध किया जाए कि संक्रमन पर काबू पाया जा सके वरना राज्य में लगाई गई पाबंदियों का कोई प्रभाव नहीं होगा और कोरोना कई जीवन निगल लेगा जो नुकसानदेय होगा।

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